बजट के बाद इनकम टैक्स में होने वाले बदलाव – budget 2020
budget 2020
– 1 फ़रवरी 2020 को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण द्धारा बजट पेश किया गया। इस बजट में इनकम टैक्स में काफी बदलाव किये गए।
बजट 2020 के सभी बदलाव 1 अप्रैल 2020 से लागू होंगे।
आज
के हमारे आर्टिकल में हम बजट budget 2020 में इनकम
टैक्स Income Tax में किये गए महत्वपूर्ण बदलावों
के बारे में जानेगे।
इनकम टैक्स
Income tax in Hindi की नयी
स्लैब
रेट
– new slab rate of income tax for F.Y. 2020 -21
बजट
2020 में इनकम टैक्स Income Tax in Hindi की एक नयी
स्लैब रेट प्रस्तावित की गयी है
हालाँकि यह स्लैब रेट
ऑप्शनल है। करदाता चाहे तो पुरानी स्लैब
रेट से भी टैक्स
दे सकता है।
करदाता
द्धारा नयी स्लैब रेट से टैक्स देने
का चुनाव करने पर कई तरह
की इनकम टैक्स इन हिन्दी
exemption और डिडक्शन से हाथ धोना
पड़ेगा, जैसे – सेक्शन 80C, सेक्शन 80D, स्टैण्डर्ड डिडक्शन, HRA, LTA, हाउसिंग लोन पर इंटरेस्ट, आदि।
इसका
मतलब यह हुआ कि
अगर कोई करदाता पुरानी स्लैब रेट से टैक्स देता
है, तो उसे सभी
तरह की exemption और डिडक्शन दी
जायेगी, लेकिन करदाता नयी स्लैब रेट से टैक्स देने
का चुनाव करता है, तो उसे कई
तरह की exemption और डिडक्शन नहीं
दी जायेगी।
फाइनेंस
मिनिस्टर के अनुसार वर्तमान
में इनकम टैक्स एक्ट में 100 से अधिक exemption और
डिडक्शन दी जा रही
है, जिसमे से 70 डिडक्शन को नयी टैक्स
स्कीम में हटा दिया गया है।
new tax slab in
budget 2020 –
taxable income slab (Rs ) existing
tax rates new tax rates
0-2.5 lakh exempt exempt
2.5- 5 lakh 5% 5%
5- 7.5 lakh 20% 10%
7.5- 10 lakh 20% 15%
10-12.5 lakh 30% 20%
12.5 – 15 lakh 30% 25%
above 15 lakh 30% 30%
इन रेट्स
Rates में
सरचार्ज
और
सेस
वर्तमान
में
लागू
रेट
से
ही
लगाए
जायेंगे।
नयी
स्लैब रेट करदाता के लिए बेनेफिटेबल
है या नहीं यह
करदाता के इन्वेस्टमेंट के
ऊपर डिपेंड करेगा , जैसे – यदि किसी करदाता ने सेक्शन 80सी
की कई स्कीम में
निवेश कर रखा है
तो उसके लिए पुरानी स्लैब Slab रेट से टैक्स देना
ही बेहतर होगा।
जैसे
– यदि कोई करदाता 15 लाख की इनकम कमाता
है और किसी भी
प्रकार की कोई exemption या
डिडक्शन क्लेम नहीं करता तो नयी स्कीम
में उसे 195000 का टैक्स देना
होगा जबकि पुरानी स्कीम में उसे 273000 का टैक्स देना
होगा। इस तरह आप
देख सकते है कि नयी
टैक्स स्कीम में 78000 का टैक्स कम
दिया गया।
TDS on mutual fund
income – section 194k ( inserted in budget 2020)
budget 2020 में
इनकम टैक्स एक्ट 1961 में नया सेक्शन 194K जोड़ा गया है।
सेक्शन
194k के अनुसार यदि कोई म्यूच्यूअल फण्ड हाउस या UTI किसी रेजिडेंट इन्वेस्टर को 5000 से अधिक का
पेमेंट करता है तो 10 % की
रेट से टीडीएस काटना
होगा। टीडीएस 5000 से अधिक इनकम
के पेमेंट के समय या
एकाउंट्स में क्रेडिट के समय, जो
भी पहले हो काटना होगा।
यह
म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टर्स के लिए बहुत
बड़ा झटका साबित होगा। वर्त्तमान में सिर्फ NRI इन्वेस्टर पर ही टीडीएस
काटने के प्रावधान लागू
थे , लेकिन बजट 2020 में रेजिडेंट इन्वेस्टर पर भी टीडीएस
TDS के प्रावधान लागू कर दिए गए।
हालाँकि,
इस टीडीएस TDS का रिफंड लिया
जा सकता है, यदि आपकी टैक्स Tax लाइबिलिटी कम है तो।
penalty for a fake
invoice – section 194AAD
बजट
Budget 2020 में इनकम टैक्स Income Tax एक्ट 1961 में एक और नया
सेक्शन 194AAD जोड़ा गया।
section 194AAD के
अनुसार यदि किसी पर्सन के बुक्स ऑफ़
एकाउंट्स में
कोई फेक इनवॉइस की एंट्री पायी
जाती है, तो उस पर्सन
पर उस फेक एंट्री
के बराबर की पेनल्टी लगायी
जाएगी।
fake invoice एंट्री
से यहाँ मतलब है किसी पर्सन
द्धारा बिना किसी गुड्स या सर्विसेज की
सप्लाई के फर्जी इनवॉइस
जारी करना या अपनी टोटल
इनकम में बदलाव करने के लिए कोई
इनवॉइस जारी करना या टैक्स बचाने
के लिए इन्वॉइस मे बदलाव करने
से है।
डिविडेंड
डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स –
वर्तमान
में कम्पनीज को अपने शेयर
होल्डर्स को डिविडेंट का
पेमेंट करने पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन
टैक्स (DDT ) का पेमेंट करना
होता था , लेकिन बजट 2020 में DDT को हटा दिया
गया है। अब डिविडेंट की
राशि शेयर होल्डर्स के हाथो में
टैक्सेबल होगी। यह इनकम शेयर
होल्डर की अन्य स्रोतों
की इनकम मानी जायेगी।
वर्त्तमान
में 10 लाख से अधिक डिविडेंड
की राशि होने पर ही यह
शेयर होल्डर्स के हाथो में
टैक्सेबल होती थी।
increase tax audit
turnover limit – section 44AB
सेक्शन
44AB में बिज़नेस पर्सन के लिए टैक्स
ऑडिट करवाने के लिए टर्नओवर
की लिमिट 5 करोड़ कर दी गयी
है, इससे पहले यह लिमिट 1 करोड़
की थी।
हालाँकि
5 करोड़ के टर्नओवर की
लिमिट तभी एप्लीकेबल होगी जब कुल बिज़नेस
ट्रांजेक्शनों में से कैश ट्रान्जेक्शन
5 % से अधिक नहीं हो।
इसके
अलावा इनकम टैक्स एक्ट के जिन सेक्शनों
में टीडीएस उन इंडिविजुअल और
HUF के द्धारा ही काटा जाता
था जिनकी टैक्स ऑडिट होनी हो के प्रावधान
को बदल दिया गया है ।
अब
टीडीएस के नए प्रावधानों
के अनुसार उन इंडिविजुअल और
HUF के द्धारा टीडीएस काटा जायेगा जिनका बिज़नेस से टर्नओवर 1 करोड़
से अधिक हो , साथ प्रोफेशनल के लिए यह
लिमिट 50 लाख की होगी।
section 80EEA
deduction extended – budget 2020
बजट
2019 में नए लोगो को
घर खरीदने के लिए प्रेरित
करने के लिए नया
section 80EEA लाया गया जिसमे 1.5 लाख की एडिशनल डिडक्शन
दी गयी। लेकिन इस डिडक्शन को
लेने के लिए होम
लोन होम लोन Home Loan 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक लिया गया
होना चाहिये।
section 234G –
inserted in budget 2020
इनकम
टैक्स Income Tax in
Hindi एक्ट 1961 में एक नया section 234G जोड़ा गया
है।
section 234 G के
अनुसार जो संस्थान सेक्शन
35 या सेक्शन 80G में रजिस्टर्ड है के द्धारा
अपने डोनेशन या अन्य स्टेटमेंट
को प्रस्तुत करने में देरी होती है , तो उन संस्थानों
पर प्रतिदिन Rs. 200 के हिसाब से
पेनल्टी लगायी जायेगी।
लेकिन,
पेनल्टी Penalty की राशि failure के
अमाउंट से अधिक नहीं
हो सकती।
TDS on payment by
e-commerce operator by e-commerce participant – section 194O
budget 2020 में
इनकम टैक्स Income Tax एक्ट में नया सेक्शन 194 -O जोड़ा गया है।
section 194 -O के
अनुसार यदि कोई e commerce पार्टिसिपेंट किसी ई कॉमर्स ऑपरेटर
के डिजिटल या ऑनलाइन प्लेटफार्म
से गुड्स या सर्विसेज या
दोनों की सप्लाई करता
है तो e commerce operator द्धारा e commerce पार्टिसिपेंट को पेमेंट के
समय या एकाउंट्स में
क्रेडिट के समय, जो
भी पहले हो, टीडीएस काटना होगा ।
टीडीएस
1 % की रेट से काटा जायेगा।
लेकिन, कोई टीडीएस नहीं काटा जायेगा जब गुड्स या
सर्विसेज या दोनों का
ग्रॉस अमाउंट एक फाइनेंसियल ईयर
में 5 लाख से अधिक नहीं
है और e commerce पार्टिसिपेंट द्धारा e कॉमर्स ऑपरेटर को पैन कार्ड
या आधार कार्ड दे दिया हो।
अगर
आपको यह आर्टिकल अच्छा
लगा हो तो इसे
आगे शेयर जरूर करे।
Source:- https://taxjankari.com/budget-2020/

Comments
Post a Comment